वैदिक ज्योतिष की 120 वर्षीय ग्रह-काल पद्धति — आप अभी किस महादशा में हैं, और इसका क्या अर्थ है।
विंशोत्तरी का अर्थ है एक सौ बीस। यह वैदिक ज्योतिष की वह पद्धति है जिसमें नौ ग्रहों को मिलाकर 120 वर्षों का कुल जीवन-काल आवंटित किया जाता है। इसे महादशा पद्धति भी कहते हैं।
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उससे पहली महादशा का ग्रह और उसकी शेष अवधि निर्धारित होती है। 27 नक्षत्र नौ ग्रहों में बराबर-बराबर विभाजित हैं — प्रत्येक ग्रह तीन नक्षत्रों का स्वामी है।
नेतृत्व, अधिकार, पिता, आत्म-प्रकाश। इस दशा में पहचान और उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित होता है।
मन, माता, पोषण, यात्रा। भावनात्मक जीवन और सामाजिक संबंध इस दशा में प्रमुख होते हैं।
ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि। कार्य और प्रतिस्पर्धा का काल।
महत्त्वाकांक्षा, भ्रम, असाधारण वृद्धि या उथल-पुथल। सबसे लंबी महादशा।
ज्ञान, धर्म, विस्तार, गुरु, संतान। प्रायः जीवन के सबसे उर्वर कालों में से एक।
परिश्रम, कर्म, दायित्व, दीर्घकालिक परिणाम। सबसे लंबी में से एक — गहरे परिवर्तन का काल।
बुद्धि, संवाद, व्यापार, लेखन। विश्लेषण और सीखने का उत्कृष्ट काल।
आध्यात्मिकता, वैराग्य, रहस्य, पूर्व-जन्म के संस्कार।
सुख, सौंदर्य, विवाह, कला, भोग। सबसे लंबी महादशा — संबंध और समृद्धि का काल।
प्रत्येक महादशा अपने भीतर अंतर्दशाओं (उप-कालों) में विभाजित होती है — 9 ग्रहों में से एक-एक करके। इन अंतर्दशाओं की अवधि महादशा के ग्रह और अंतर्दशा के ग्रह के अनुपात में होती है।
उदाहरण: शनि महादशा (19 वर्ष) में पहली अंतर्दशा शनि की ही होती है (3 वर्ष 1 माह), फिर क्रमशः बुध, केतु, शुक्र आदि की। इससे भी आगे प्रत्यंतर्दशा (उप-उप-काल) होती है।
MeriKundali आपकी वर्तमान महादशा, अंतर्दशा, और प्रत्यंतर्दशा प्रत्येक राशिफल में दर्शाता है।
दशा और गोचर दोनों मिलकर एक समग्र चित्र बनाते हैं। दशा बताती है कि इस समय आपके जीवन में कौन-सा ग्रह आंतरिक रूप से प्रमुख है। गोचर बताता है कि वही या अन्य ग्रह आकाश में अभी किस स्थिति में हैं। जब दशा-ग्रह और गोचर-ग्रह एक ही दिशा में हों, तो फल तीव्र होते हैं।
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उस नक्षत्र का स्वामी ग्रह पहली महादशा का ग्रह होता है। जन्म के समय नक्षत्र में चंद्रमा जितना भाग पूरा कर चुका था, उसके अनुसार पहली महादशा की शेष अवधि घटाई जाती है।
दशाओं का क्रम सभी के लिए एक ही है: सूर्य → चंद्र → मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध → केतु → शुक्र → और फिर पुनः सूर्य। अंतर केवल इतना होता है कि किस दशा से जीवन शुरू होता है और पहली दशा कितनी शेष है।
दशा एक काल-संरचना है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। जन्म-कुंडली में ग्रह की मूल स्थिति, उसका बल, और चलते गोचर — ये सब मिलकर वास्तविक अनुभव को आकार देते हैं। MeriKundali इसे वर्णनात्मक रूप में प्रस्तुत करता है।
आपकी जन्म-कुंडली से
अपनी जन्म-तिथि, जन्म-समय और जन्म-स्थान डालें — MeriKundali आपकी वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा शास्त्रीय नियमों से निकालेगा।
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